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Wednesday, July 10, 2019

मेरी पत्नी....मेरा भरोसा

                     मेरी पत्नी....मेरा भरोसा

                   
                   
 आज मैं उसे पहली बार देखने जा रहा था।मै हमेशा अपने दोस्तों से एक सुंदर, सुशील और संस्कारी लड़की से शादी करने की बात करता था।लड़की को देखने जाते समय मेरे दिल में बहुत सारे सवाल उठ रहे थे, कि वह कैसी होगी। क्या वह मेरे लायक होगी। क्या मैं उसके लायक होऊंगा। क्या वह मुझे पसंद करेगी। क्या वो सुंदर होगी। क्या वह मुझे समझ पाएगी। इतने सारे सवालों के साथ मैं अपनी गाड़ी से अपनी होने वाली पत्नी को देखने के लिए मकबरे में जाता हूं। मेरा भाई मकबरे के दरवाजे पर मेरा इंतजार कर रहा था। जैसे ही मैं मकबरे के दरवाजे पर पहुंचता हूं।  मेरा भाई मुझे अंदर से आवाज लगाता है।और अपनी ओर आने का इशारा करता है।  मैं धीरे धीरे अपने भाई की ओर बढ़ रहा था। साथ ही वहां पर बैठे लोगों की ओर भी मेरा ध्यान जा रहा था। और मन ही मन यह सोचता जा रहा था,कि कहां है वह जिसे मैं देखने के लिए आया हूं। मैं भगवान से  मन ही मन यह प्रार्थना कर रहा था। कि जो भी हो बस अच्छी  हो। मैं अंदर से थोड़ा घबरा भी रहा था ।क्योंकि मैं पहली बार किसी लड़की को देखने जा रहा था,जो मेरी जीवनसंगिनी होगी। मुझे इतना डर किसी लड़की को  देख कर नहीं लगा था। जितना डर मुझे इस लड़की को देखने आने के लिए लग रहा था। पता नहीं ऐसा क्या हो रहा था। यह तो भगवान ही जाने। लेकिन जैसे ही मैं उस गार्डन में पहुंचता हूं।जहां पर सारे लोग बैठे हुए होते हैं। मेरी निगाहें उस लड़की को ढूंढने लगती हैं। कई सारी लड़कियों के बैठे होने के बावजूद भी मेरी निगाहें मेरी होने वाली पत्नी को ढूंढ लेती है।वो पीली साड़ी में, लंबी सी चोटी किए हुए, गोरे से चेहरे में, हल्की सी लाली के साथ, सिर झुकाए हुए,वहां पर बैठी थी ।शायद यह कुदरत का ही कुछ इशारा था,कि बिना किसी के बताए, मैं उसे पहचान गया था। जैसे ही मैं,सब लोगों के पास पहुंचता हूं।उस लड़की के घर वाले मुझे सम्मान की नजरों से देखते हैं। और मुझे नीचे बैठने के लिए कहते हैं।मैं लड़की के सामने बैठ जाता हूं।और लड़की के सिर ऊपर उठाने का इंतजार करता हूं।तभी उनमें से एक लड़की बोलती है। कि जीजू तो बहुत अच्छे हैं। यह बात सुनकर मेरी होने वाली पत्नी अपना  सिर ऊपर उठाती है।और उसकी नजरें मेरी नजरों से मिल जाती हैं। जैसे ही  हमारी नजरें मिलती हैं। मेरे दिल में एक अजीब सी घंटी बजना शुरू हो जाती है।और अंदर से एक आवाज आती है कि यह वही लड़की है जिसकी मुझे तलाश थी।मैं अक्सर जिस तरह की लड़की सोचा करता था। यह बिलकुल वैसी की वैसी ही थी। ऐसा लग रहा था। कि जैसे मेरा सपना सच हो गया हो।और भगवान ने मुझे वह लड़की दे  दी हो। यह बिल्कुल वैसी ही थी। मेरा मन अंदर से खुशी के मारे फूला नहीं समा रहा था। ऐसा लग रहा था जैसे मुझे दुनिया की सारी दौलत मिल गई हो। और मेरी सारी ख्वाहिशें पूरी हो गई हो। मैं बहुत खुश था। 
                
                    तभी मेरी होने वाली साली बोलती है,कि दीदी से जो पूछना है,पूछ लीजिए। मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था। मैं बस उसे बार-बार देखे जा रहा था और अंदर से घबराता भी जा रहा था।और सोच रहा था कि कुछ भी हो जाए मैं इसी लड़की से शादी करूंगा ।  तभी मेरी माँ मुझे  उस लड़की से  कुछ  पूँछने के लिए बोलती हैं।  लेकिन  मैं कुछ भी  पूछने की  हालत में नहीं लग रहा था।  मुझे समझ नहीं आ रहा था । कि मैं क्या पूँछू।  इतने सारे लोगों के बीच  मुझे खुद शर्म भी आ रही थी। तभी मेरी होने वाली साली बोलती है। कि शायद दोनों लोग शरमा रहे हैं। इन्हें थोड़ी देर  बात करने के लिए अकेला छोड़ देना चाहिए। मैं अपनी होने वाली साली की ओर मुस्कुराते हुए देखता हूं। और अंदर ही अंदर  उसे  धन्यवाद भी देता हूं। कि कम से कम किसी ने तो मेरे दिल की बात समझी। आखिर मेरी माँ ने यह बात सुनकर, मुझे उस लड़की के साथ अकेले बात करने के लिए बोलती हैं। मेरे लिए जो कुछ भी हो रहा था। वह सपने से कम नहीं था।क्योंकि मैं लड़कियों के मामले में बहुत ही डरपोक किस्म का लड़का था।मैं और वह लड़की, दोनों लोग धीरे धीरे वहां से थोड़ा दूर दूसरे गार्डन में जाने लगे और वहां पर बने एक चबूतरे के पास जाकर खड़े हो गए हैं। मैं उस लड़की को चबूतरे पर बैठने के लिए बोलता हूं।चूँकि चबूतरा थोड़ा ऊंचा होता है। इसलिए मैं मन ही मन सोचता हूं कि यह चबूतरा तो ऊंचा है।और यह साड़ी पहने हुए हैं। यह चबूतरे पर कैसे बैठ पाएगी।मैं यह सोच ही रहा था। कि वह उछलकर चबूतरे पर बैठ जाती है। मैं उसे देख कर मन ही मन मुस्कुराने लगता हूं। वह भी मुझे देख कर हंसने लगती हैं।  हमारे बीच में बातें होने लगती हैं  हम एक दूसरे से अपने बारे में बातें  करने लगते हैं और एक दूसरे की पसंद नापसंद और एक दूसरे से और भी बहुत सारी बातें जानने की कोशिश करते हैं तभी मेरी सासू मां वहां आ जाती है, और बोलती है। कि क्या तुम्हें हमारी लड़की पसंद है। मेरे मुंह से तुरंत हाँ निकल जाता है और अपनी गर्दन हिलाते हुए अपनी खुशी का इजहार करता हूं। हम वापस वहीं सब लोगों के पास आ जाते हैं। और हम अपनी रजामंदी के बारे में बता देते है । सारे लोग खुश हो जाते हैं। और एक दूसरे को मिठाई खिलाते हैं।थोड़ी ही देर बाद हमारे अलग अलग जाने का समय आ गया था। वह अपने घर निकलने के लिए तैयार थी। मेरा मन कर रहा था कि मै थोड़ी देर और उससे बात कर लूँ। लेकिन मेरी हिम्मत नहीं हो पा रही थी। तभी मैं क्या देखता हूं कि जो लोग मुझे देखने के लिए आए थे उनकी गाड़ी बंद हो जाती है। और कई बार चालू करने के बाद भी चालू नहीं होती हैं। सभी लोग मेरी ओर देख रहे थे। तभी मेरी माँ मेरी होने वाली सासू मां से बोलती हैं कि अगर आप लोगों  की गाड़ी खराब हो गई है। तो आप श्याम के साथ चले जाओ। यह आपको घर तक छोड़ देगा।यह बात सुनकर मुझे मन ही मन खुशी होती है,और मेरी सालियां भी बहुत खुश हो जाती हैं।मैं अपनी होने वाली पत्नी को ,उसके साथ दो सालियों को लेकर उसके घर जाता हूं।और जैसे ही घर पहुंचता हूं। तो मेरी एक साली यह बोलकर मेरा नंबर ले लेती है कि आप अपना फोन नंबर मुझे दे दो,हम आपसे  थोड़ी बात कर लिया करेंगे। मैं अपना नम्बर दे देता हूँ ।
                                      मैं उसे घर छोड़ कर अपने घर की ओर चल देता हूँ। शाम को मेरे फोन पर फोन आता है।यह फोन किसी और का नहीं,बल्कि मेरी होने वाली साली का था। वह मेरा हाल-चाल पूँछने के बाद वह फोन मेरी होने वाली पत्नी को दे देती है।हमारे बीच अक्सर बाते होने लगती है। और हम एक दूसरे को जानने की कोशिश करते रहते है।चूँकि मेरी होने वाली पत्नी उस समय लखनऊ में रहा करती थी।और मेरा ट्रांसफर भी कानपुर आ जाता है।
                 
                      
         मैं अक्सर समय निकाल कर अपनी होने वाली पत्नी से मिलने लखनऊ जाने लगा था। मैंने ये बात अपने घर मे किसी को नही बताई थी। हमारे बीच मुलाकातो का सिलसिला ऐसे चलता है ।जैसे हम गर्लफ्रेंड बाॅयफ्रेड हो। मेरे घर वाले हमारी सगाई की तारीख़ के बारे में मुझे बोलते हैं।और साल के अन्त मे सगाई करने की बात करते हैं 4-5महीना निकल जाने के बाद ,हमारी सगाई का दिन आ गया था। यहां हमारे घर पर चलने की तैयारी हो रही थी और  वहां मेरी होने वाली पत्नी के घर मे कुछ घटना हो जाती है उसके किसी रिश्तेदार की दुर्घटना हो जाती है मेरे होने वाले ससुर का मेरे पिताजी के पास फोन आता है और हम लोगो को आज आने के लिए मना करते हुए,ना आने का कारण बताते है ।पिताजी के द्वारा सगाई के लिए ना जाने की बात सुन कर मुझे बहुत बुरा लगता है और हमारी सगाई की तारीख़ और आगे बढ़ जाती है कुछ महिने का इंतजार और बढ जाता है। कुछ महिने बीतने के बाद दोबारा सगाई का दिन आता है। और फिर  हम लोग सगाई के लिए चलने की तैयारी करते हैं। और तभी पिताजी के फोन पर फोन आता है। फोन पर बात करने के बाद सगाई के लिये जाने से फिर से मना कर देते है।और कहते हैं कि अपने गाँव में जो बाबा थे वो अब नही रहे ।और अब हमे सगाई मे ना जा कर, गाँव जाना होगा। वहाँ मेरी होने वाली पत्नी के घर पे पूरी तैयारी हो चुकी थी। तभी मेरी माँ मेरी होने वाली सासु माँ को फोन करके सगाई ना करने की बात करती है और बोलती है कि तुम अपनी लड़की अपने पास रखो, पता नही क्या हो गया है कि जब भी सगाई की बात आती है तब तब कुछ ना हो जाता है। मुझे अपनी माँ की बातें अच्छी नहीं लग रही थी। और मैं अपनी माँ से बोलता हूँ कि मेरी सगाई इसी लडकी से होगी और शादी भी ।मेरी बात सुन कर मेरी माँ मुझे घूरते हुए देखती है। और मैं वहाँ से चला जाता हूँ। मुझे मेरी होने वाली पत्नी पर पूरा भरोसा था कि वही मेरे लिये सही जीवनसाथी हो सकती है। और मैं अपने घर वालो से दोबारा सगाई के लिये बोलता हूं। चूँकि वैसे तो मैं बहुत शर्माता था अपनी शादी की बात करते हुए। लेकिन जब से मेरी माँ ने सगाई ना करने की बात बोली थी।तब से मै शर्माना छोड़ देता हूं। आखिर मेरा भरोसा जीत जाता है और हमारी सगाई हो जाती है।
                 
                     
 मेरी माँ मुझ से गुस्सा रहने लगती है और मेरी भैया-भाभी को भी ये सगाई पसन्द नही थी मेरे घर मे सभी लोग मुझ से गुस्सा रहने लगते हैं और कुछ दिनो बाद हमारी शादी होती है शादी अच्छे से हो जाती हैं मेरी पत्नी मेरे घर के काम सिखने लगती है चूँकि मेरी शादी से घर के लोग ज्यादा खुश नही थे। वो बोलते थे कि ये लड़की सही नही है। लेकिन मेरा विश्वस मेरी पत्नी पर पूरा था। मैने अपनी पत्नी को मेरे घर वालो का अच्छे से ख्याल रखने की बात कही. धीरे धीरे मेरी पत्नी का खुश-मिजाज स्वभाव और उसके काम करने से सभी लोग खुश हो जाते है। वो हमेशा घर वालो को खुश रखने की कोशिश करती रहती थी। कई बार घर वालो के द्वारा उसकी बुराई सुनने के बाद भी मुझे उस पर बहुत भरोसा था आज मेरे भैया भाभी अलग अपने घर मे रह्ते है मेरी माँ और पिताजी काफ़ी बुढे हो गये है।आज उनकी हर जरूरत को मेरी पत्नी पूरा कर रही है। कई बार मैं बिना पूरी बात जाने उसे डांट देता था फिर भी वह खुद ही मुझ से माफी मांग लेती थी। आज मेरी पत्नी  मेरे माँ और पिताजी की सेवा करके उनका दिल जीत लेती है और मेरे माँ और पिताजी मेरी पत्नी की तारीफ़ करते हुए, मेरा मेरी पत्नी के लिये किये गये भरोसे की तरीफ़ करते है 
                 
                    
       और बोलते है कि हर आदमी को अपनी पत्नी पर पूरा भरोसा होना चाहिये। और पत्नी को भी अपने पति के भरोसे पर खरा उतरना चाहिये। ये जो रिश्ता है ये केबल विश्वास और भरोसे पर चलता है। इसमे जितना हम एक दूसरे की भावनाओ को समझते है। यह रिश्ता उतना ही गहरा होता चला जाता है।इसलिए कभी भी पति को अपनी पत्नी या पत्नी को अपने पति का भरोसा नही तोड़ना चहिये और जिंदगी भर साथ निभाना चाहिए ।



Monday, July 8, 2019

असफलताओं से सफलता की ओर


            असफलताओं से सफलता की ओर
                      
                
आज मैं बहुत डरा हुआ था क्यो कि आज मेरा 10वी कक्षा का परिक्षा  परिणाम आने वाला था मैने डर की वजह से अपना रोल नम्बर  भी किसी को नही दिया था सभी लोग मेरे रोल नम्बर के पीछे पड़े रहते थे कि अपना रोल नम्बर दे दो।लेकिन मैने अपना रोल नम्बर किसी को नही दिया था।आज जब परिणाम आने वाला था तो मैं अपने घर से काफ़ी दूर एक मैदान मे बैठा हुआ था। और सोच रहा था कि अगर मै 10वी कक्षा मे अनुत्तीर्ण हो गया तो मैं क्या करूँगा। मैं अपने घर वालो से नज़रे कैसे मिला पाऊँगा। और यही सोच सोच कर मै मन ही मन में एक अजीब सी घुटन मह्सूस कर रहा था।  मेरे मन में बहुत ही अजीब से खयाल आ रहे थे मैं कुछ सोच ही रहा था। कि पीछे कुछ दूर से आवाज आती है "ओये  अनू , तू वहां क्या कर रहा है " चिल्लाते हुए मेरा एक दोस्त मेरे पास आता है। और कहता है कि आज तो तेरा परिक्षा परिणाम आने वाला था। मै उसकी बातो को नजर अन्दाज करके अपने घर की ओर चल देता हूँ। मैं घर पहुंचा ही था कि पापा मेरे ऊपर चिल्लाना शुरू कर देते हैं और तेज आवाज मे चिल्लाते हुए कहते हैं कि देखो "ये आ रहे हैं हमारे लाड शाहब जो 10वी मे अनुत्तीर्ण हो गये हैं। " और कहते हैं कि तुम्हारे कक्षा अध्यापक का फोन आया था बोल रहे थे कि अनू अनुत्तीर्ण हो गया है।
                                  पापा बस चिल्लाते जा रहे थे,माँ भी पापा के साथ सुर में सुर मिला रही थी। वो भी बस यही बोल रही थी कि क्या कमी रह गई थी। हमारे पढाने मे, कि तू अनुत्तीर्ण हो गया।तूने  हम लोगों की  पूरे कॉलोनी  में  नाक कटवा दी। मै माँ और पापा की बातों को चुप चाप सुन रहा था। थोड़ी देर बाद जब सब शांत हो जाते हैं। तो मैं चुप चाप वहा से अपने कमरे में चला जाता हूं। और यही सोचता रहता हूँ। कि आखिर क्यो मैं ही अनुत्तीर्ण रहा और लोग कैसे उत्तीर्ण हो गये। मेरे दिमाग मे एक अजीब सी उथल पुथल चल रही थी।
तभी मेरी बड़ी बहन(आरती) आती हैं,और पूँछती है कि इतना उदास क्यो है। 10वी मे ही तो अनुत्तीर्ण हुआ है ना, जिंदगी में तो नहीं।. तू आज से ही दोबारा 10वी की पढाई शुरु कर ।और अगर कोई समस्या आती है पढाई में, तो मुझे सम्पर्क करना ।अपनी बडी बहन(आरती) की ये बाते ,मेरे लिए अम्रत की तरह काम कर रही थी। जो मुझे पुनः एक बार फिर से आगे बढ़ने की ऊर्जा दे रही थी।और मैने फिर से एक बार अपनी पढाई की शुरुआत कर दी। लेकिन शायद मेरी किस्मत ही खराब थी मैं इस बार फिर से 10वी मे अनुत्तीर्ण हो गया। मेरे घर वाले मुझ पर जोर जोर से चिल्ला रहे थे। मुझे कुछ समझ नही आ रहा था,कि मैं क्या करू।. मेरी बड़ी बहन(आरती) मेरे पास आती हैं। और मेरे अनुत्तीर्ण होने का कारण पूँछती हैं मेरा यही जवाब रहता है कि मैने अपनी तरफ़ से पढाई में कोई कमी नही की, लेकिन फिर भी मैं अनुत्तीर्ण हो गया।अब मेरा पढाई में बिल्कुल मन नही है। मै नौकरी करना चाहता हूँ। मेरे मुह से नौकरी की बात सुन कर मेरी बहन(आरती) जोर जोर से हंसने लगती है। और कहती हैं कि तू नौकरी करेगा,वो भी इतना कम उम्र मे, और बहन बोलती है कि अगर तुझे नौकरी ही करनी है, तो पहले अपनी पढाई पूरी कर ले और फिर नौकरी कर लेना। बड़ी बहन के समझाने पर,मै उसकी बात मान कर ,एक बार फिर से पढाई में मन लगाने और 10वी कक्षा उत्तीर्ण के लिए मेहनत करने लगा। मैंने अपनी बड़ी बहन से वादा कर लिया था कि इस  बार मैं दसवीं कक्षा  उत्तीर्ण करके  जरूर दिखाऊंगा। लेकिन मेरी किस्मत ही खराब थी,उसे तो मेरा अनुत्तीर्ण होना ही मंजूर था। और मैं इस बार फिर से  दसवीं कक्षा में अनुत्तीर्ण हो गया। मुझे समझ नहीं आ रहा था। कि मैं क्या मुंह लेकर अपने घर जाऊं और अपनी बहन और अपने मां बाप को क्या मुंह  दिखाऊँ। मैं बहुत ज्यादा हताश और परेशान था।क्योंकि मेरा मन पढ़ाई में बिल्कुल नहीं था लेकिन बड़ी बहन के कहने पर मैंने दसवीं कक्षा  को दोबारा से पढ़ने का सोचा। मैं अपनी बड़ी बहन से वादा कर चुका था।मेरी बड़ी बहन ने मुझे हर बार आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया था। लेकिन मैं कभी भी  उनके  विश्वास पर खरा नहीं उतर सका। मैं अपनी बड़ी बहन को  अपनी सबसे  बड़ी शक्ति मानता हूं ।इस बार फिर से मैं अपनी बहन को  किए हुए वादे को नहीं निभा पाया ।परिणाम वही का वही रहा, अर्थात मैं फिर से अनुत्तीर्ण हो गया ।जैसे ही  मैं घर  घर पहुंचता हूं मेरे ऊपर गुस्से की बारिश ऐसे होती है। जैसे किसी आतंकवादी को देख कर उन पर गोलियां चलाना शुरू कर देते हैं।मेरे मम्मी पापा दोनों लोग  मेरे अनुत्तीर्ण होने पर बहुत  बहुत अधिक गुस्सा होते हैं।मेरी दीदी भी मेरे अनुत्तीर्ण होने पर  गुस्से में थी।वह समझ नहीं पा रही थी, कि ऐसा क्या है। कि मैं कैसे  हर बार दसवीं कक्षा में अनुत्तीर्ण हो जाता हूँ। आखिरकार घर वालों के  गुस्से की वजह से , मैं पढ़ाई छोड़ देता हूं।और  घर से दूर एक नए शहर(भोपाल) में चला जाता हूं। और नौकरी के लिए इधर उधर भटकने लगता हूं।चूँकि  मेरे पास कोई भी डिग्री या फिर किसी तरीके की कोई योग्यता नहीं थी, की कोई मुझे नौकरी दे। मैं कई जगह  साक्षात्कार देने गया,लेकिन मुझे कहीं पर भी नौकरी नहीं मिली ।एक  दिन थक हार कर  एक दुकान पर बैठकर अखबार पढ़ रहा था। तभी अखबार में एक इश्तिहार देखता हूँ। "जहां पर लिखा होता है की एक न्यूज़ एजेंसी में  छोटे लेख लिखने के लिए एक लेखक की जगह खाली है "
                                     मैं न्यूज़ एजेंसी में एक लेखक के तौर पर साक्षात्कार के लिए चला जाता हूं। मेरे पास ना तो कोई डिग्री थी और ना ही कोई अतिरिक्त योग्यता,किंतु फिर भी मेरा साक्षात्कार बहुत अच्छा जाता है।और मुझे एजेंसी में कुछ छोटे लेख लिखने के लिए नौकरी मिल जाती है। धीरे धीरे मैं छोटे-छोटे लेख अखबार में लिखने लगता हूँ। मेरे छोटे-छोटे लेख लोगों को बहुत पसंद आने लगते हैं। मेरे  द्वारा लिखे हुए लेखों की मांग दिन प्रतिदिन बढ़ने लगती है। और अब मैं बड़े-बड़े लेख लिखने लगता हूँ।  लोग मेरे लेखों को बहुत पसंद करने लगे। एक दिन मुझे  मेरे ऑफिस में एक लड़की मिलती है।चूँकि मैं लड़कियों से बहुत कम बात करता था। इसलिए शायद मैं उस लड़की को नहीं जानता था लेकिन वह लड़की मेरे बारे में सब कुछ जानती थी।वह आते ही  मुझसे कहती है "बधाई हो अनिरुद्ध, क्या तुम्हें पता है कि आज तुम्हारा लेख सबसे ज्यादा  बार पढ़ा गया लेख है"। क्यों ना तुम अपनी एक किताब लिखो। लड़की की बातें मेरे दिमाग में घर करती जा रही थी।और अगले दिन से मैं अपनी एक किताब लिखना शुरू कर  देता हूं और वह किताब छपने के बाद, बाजार में आ जाती है। मेरी किताब बहुत जोर से मांग में आ जाती है। और मुझे मेरी किताब के लिए "बेस्ट बुक ऑफ द ईयर" का अवार्ड भी मिलता है 
एक दिन जब मैं वापस अपने घर आता हूं। तो जैसे ही दरवाजा खटखटाता हूं। मेरी मां दरवाजा खोलती हैं।और मुझे सामने देख, गले लगा कर रोने लगती है।और कहती हैं ,इतने दिन से कहां था।क्या तुझे हमारी बिल्कुल भी याद नहीं आई। मां के गले लगे हुए मां की बात सुनकर मुझे भी रोना आ जाता है।और रोते रोते मैं मां से पूछता हूं। कि पापा जी कहां है। मां  कमरे की ओर इशारा करते हुए बताती है। मैं कमरे की ओर चल देता हूं कमरे में बैठे हुए मेरे पापा चुपचाप एक किताब पढ़ रहे होते हैं।पास जा कर देखता हूं, तो क्या देखता हूं।कि मेरे पापा मेरे द्वारा लिखी हुई किताब असफलताओं से सफलता की ओर पढ़ रहे हैं। पापा को मेरे द्वारा लिखी हुई किताब को पढ़ते हुए देख बहुत खुशी होती है और मैं पापा के पैर छूकर उनका आशीर्वाद लेता हूं। मेरे पापा मेरे गले लग कर जोर से रोने लगते है और अपने द्वारा  किए गए गुस्से के लिए माफी मांगते हैं और कहते हैं।कि  मुझे माफ कर दो बेटा मैंने तुम पर बहुत गुस्सा किया। पापा की यह बात सुनकर मुझे रोना आ जाता है।और मैं पापा के पैर पकड़कर पापा  का शुक्रगुजार होने की बात करता हूं। और कहता हूं।कि पापा अगर आप सब लोग मेरे ऊपर इस तरीके से गुस्सा नहीं हुए होते और आप इस तरीके से मुझ पर चिल्लाए नहीं होते।  तो शायद मैं इस मुकाम पर नहीं होता। मैंने अपनी इस किताब में सिर्फ और सिर्फ वही लिखा जो मेरे साथ हुआ है ।अर्थात  आजकल के मां बाप अपने बच्चों पर पढ़ाई के लिए किस तरह से अपना गुस्सा निकालते हैं और उनकी मजबूरी को समझे बिना उन पर अपना निर्णय थोप देते है। और उनके उतीर्ण और अनुत्तीर्ण होने को अपने मान-सम्मान से जोड़ लेते हैं। मेरी यह किताब सिर्फ और सिर्फ उन मां-बाप को समर्पित है। जो अपने बच्चों को ना पहचान कर सिर्फ और सिर्फ झूठे सम्मान की खातिर  गलत तरीके से अपने बच्चो को प्रताड़ित करते हैं। जिस कारण बच्चे गलत रास्ते पर निकल पड़ते हैं।
                           मेरी यह बातें सुनकर पापा फूट-फूट कर रोते हैं और वादा करते हैं कि मैं कभी किसी को भी यह सलाह कभी नहीं दूंगा कि वह  अपने सम्मान के लिए बच्चे के उत्तीर्ण और अनुत्तीर्ण होने पर उन्हें गुस्से में प्रताड़ित करें।

        आज मैं एक  सफल लेखक बन चुका हूं मेरा पूरे देश विदेश में नाम है।लोग मुझे बहुत अच्छे से पहचानते हैं। आज जब भी मैं अपने अतीत को देखता हूं।तो ऐसा लगता है कि जैसे मैं असफलताओं की सीढ़ियां चढ़ते चढ़ते, एक सफलता के शिखर पर बैठा हूं। और इसीलिए मेरी जो पहली किताब थी जिसके लिए मुझे बेस्ट बुक ऑफ द ईयर का अवार्ड मिला था का नाम भी असफलताओं से सफलता की ओर रखता हूं।







Friday, July 5, 2019

सही सवाल ....एक बेहतर कल

                 सही सवाल ....एक बेहतर कल 



आजकल समाज का माहौल दिन प्रतिदिन बदलता जा रहा है।जहां हम अपने बच्चों के भविष्य के लिए हर सम्भव कोशिश मे लगे रहते हैं।. वही हम आजकल अपने बच्चों से दूर भी होते जा रहे है।. हम अपनी भौतिक सुख सुविधा के पीछे भागने मे लगे रहते हैं। और इसी भागदौड़ मे हम अपने बच्चों को समय देना भूल जाते हैं.। जब भी अपने बच्चों से बात करते हैं तो सिर्फ़ यहि की आप कैसे हो, स्कूल कैसा चल रहा हैं एग्जाम कब से है।. पढाई कैसी चल रही है। इस तरह के सवाल रह्ते है। बच्चा भी धीरे धीरे इन सवालो का आदी हो जाता है और वह भी "हाँ  ठीक है " "अच्छा है "।इस तरह के जवाब देना शुरू कर देता है।


                                          हमे चाहिये कि हम अपने सवाल थोडा अलग तरीके से करे. जिससे कि बच्चा उन सवालो का जवाब "हाँ " "नही " और" ठीक है " से हट कर कुछ और दे सके.
हमे चाहिये कि हम पूछे कि
 आज तुम्हरी क्लास मे कितने बच्चे आये थे।
 तुम्हरी क्लास टीचर कौन से रंग के कपड़े पहन के आये थे।
. तुमने किस किस के साथ अपना खाना खाया और किस किस को खाना खिलाया ।
तुमने आज स्कूल मे किस की मदद की ।

तुमने आज कौन सा सबसे अच्छा काम किया है ।
इस तरह के सवाल पूछ्ने से और उसे ये सब बाते बताने से एक तो उसे अपने आस पास कौन कौन है, इसका पता चलता है। साथ ही साथ उसे लोगो की मदद करना की भावना आती है।साथ ही साथ उसका दिमाग हमेसा सतर्क रह्ता हैं। उसमे लोगो को याद रखने,रंग पहचानना, अपनी
बात बोलने आदि से उसके दिमाग का विकास होता है .
तथा जैसे जैसे बच्चे बड़े होते जाते हैं उन्हे प्यार के साथ साथ, एक दोस्ती का अह्सास भी कराना चाहिये. हमे
अपने बच्चों के साथ एक दोस्त की तरह बन कर रहना चाहिए कोशिश करनी चाहिए कि पति पत्नी को अपने बच्चों के सामने कभी भी बहस ना करे और ना ही कभी एक दूसरे को नीचा दिखाने की कोशिश करनी चाहिए क्योकि बच्चे जैसा देखते हैं वैसा हि वो अपने जीवन मे उतारते है




हमे अपने बच्चों को अन्जान लोगो से किस तरह बात करे तथा अन्जान या कोई रिश्तेदार के द्वारा एक अच्छे स्पर्श और एक बुरे स्पर्श के बारे मे समझाना चाहिए और हमेशा एक बात जरूर बोले के कभी भी कोई भी काम करते समय अगर कभी मन मे ये ख्याल आये कि ये काम सही है या गलत,तब सिर्फ़ तुम अपने माता पिता को याद करे और सोचो कि क्या मेरे माता पिता मेरे इस काम से खुश होगे की नही .तुम्हे खुद व खुद सही रास्ता मिल जायेगा.
                      अतः अंत में यही कहना चहूँगा की बच्चे आप का सबसे बडा धन है उन्हे जितनी अच्छी शिक्षा और संस्कार मिलेंगे वह उतना अच्छे नागरिक बनेगे.

                           

Thursday, July 4, 2019

रोजगार .....एक सलाह

                    रोजगार .....एक सलाह


एक बार की बात है। मैं बडे दिनो बाद गाँव जा रहा होता हूँ। गाँव के दोस्तों के साथ मिले हुऐ भी बहुत दिन हो गए थे। गाँव के सभी रिश्तेदार अक्सर मुझसे गाँव न आ पाने के लिए शिकायत किया करते थे। गाँव में सभी लोग मुझे शहरिया बाबू कह के बुलाते थे। गाँव की बातों और गाँव के लोगों के बारे मे सोचते हुए मैं अपनी कार से गाना गुनगुनाते हुए चला जा रहा था। काफी देर तक कार चलाने की वजह से थोडी थकावट होने लगी और  थोड़ा चाय पानी करने के लिए  एक ढाबे पर कार को  रोका।

ढाबे वाले के यहां पर लोगों की भीड़ देखकर ऐसा लग रहा था। जैसे सारा का सारा खाने का ठेका इसी ने ले रखा हो। काफी देर के बाद मेरा भी नंबर आता है।  और ढाबा वाले के यहां पर चाय नाश्ता करने के बाद थोड़ा ही आगे चलता हूं। कि देखता हूं,कि एक लड़का मेरी गाड़ी को रोकने के लिए इशारा करता है। मैं अपनी गाड़ी थोड़ा आगे जाकर  रोकता हूं। लड़का दौड़कर मेरी गाड़ी के पास आता है और मुझे प्रार्थना करता है कि उसकी एक बहन बहुत बीमार है। उसे आगे कुछ दूर हॉस्पिटल तक लेकर चलना है। क्या आप मेरी मदद करेंगे। मैं उसकी ओर देखकर उसको, उसकी बहन के साथ आने के लिए बोलता हूं। उसकी बहन को गाड़ी में पीछे बिठाकर लड़का मेरे बगल वाली सीट पर बैठ जाता है।और हम लोग आगे की ओर चल देते हैं। रास्ते में चलते चलते मैं उस लड़के से उसके बारे में जानने की कोशिश करता हूं।और कहता हूं कि तुम क्या करते हो और तुम्हारे घर में कौन-कौन है। लड़का जवाब देता है, मैं कुछ नहीं करता हूं। मैं बेरोजगार हूं। मेरे पिताजी बहुत बीमार रहते हैं और थोड़ा बूढ़े भी हैं मेरी मां भी बुढी़ है। मेरे घर में दो और छोटी-छोटी बहने हैं। उन सभी की जिम्मेदारी मेरे ऊपर है। मैं अक्सर मजदूरी का काम करता हूं, लेकिन अभी कुछ दिनों से मजदूरी ना मिलने की वजह से मेरे घर के हालात खराब है। मेरी बहन काफी दिनों से  बीमार है।लेकिन पैसों की तंगी की वजह से मैं इसे  अस्पताल नहीं लेकर आ पाया। कल जब मुझे कुछ मजदूरी मिली, तब कुछ पैसे आने  से, आज मैं इसे अस्पताल में दिखाने जा रहा हूं। धन्य हो आपका कि आपने मुझे अस्पताल तक छोड़ने की कृपा की। मैं आपके अगर कभी भी कोई भी काम आ सका तो मेरे लिए बहुत अच्छा होगा। मैं उसकी बातों को बड़े गौर से सुन रहा था तभी मुझे मोदी जी की बेरोजगार हो तो पकौड़े तलो।  वाली बात याद आती है। और मैं उसे  कुछ बातें बताता हूं। और अस्पताल के सामने समोसे और पकोड़े का धंधा खोलने का विचार देता हूं। यह सब बातें करते करते अस्पताल आ चुका होता है। मैं उस लड़के को उसकी बहन के साथ अस्पताल तक छोड़ कर अपने गांव की ओर चला जाता हूं। मैं गांव के नजदीक पहुंचने वाला ही था,कि रास्ते में मुझे मेरे ही  गांव की एक लड़की दिखाई देती है। जो अपने पिताजी के साथ सड़क पर पैदल जा रही होती है। मैं गाड़ी को थोड़ा किनारे पर लगा कर उन्हें अपने पास बुला कर गाड़ी में बैठने के लिए बोलता हूं।  वह लड़की और कोई नहीं मेरे चाचा की लड़की तथा वह आदमी और कोई नहीं बल्कि मेरे चाचा ही थे ।काफी दिनों बाद मिलने की वजह से पहली बार मे पहचानने में थोड़ा सा असमंजस रहा । और फिर  हम लोग आपस में बात करते हुए गाँव के बिलकुल नजदीक पहुंचने वाले होते हैं। चाचा मुझसे बहुत शिकायते गिनाते चले जा रहे थे। गाँव पहुंचने पर जैसे ही लोग देखते हैं कि मैं आया हूँ। लोग भीड लगा कर खडे हो जाते हैं।और मेरे आने के बारे में पूँछते है। तभी सामने से चाचा की लड़की(पिन्की) दौडती हुई आती हैं। और  घबराते हुए मेरी कार के अंदर इधर उधर ताक झांक करती है और घबरा कर जोर से चिल्लाकर बोलती है कि मेरा सोने की चीज से भरा बैग कार में नहीं है। पिंकी को चिल्लाता हुआ देख वहां खड़े सारे लोग एकदम से हैरान रह जाते हैं। और पिंकी के बैग को  ढूंढने की सब लोग मिलकर कोशिश करते हैं। काफी देर ढूंढने के बाद जब बैग नहीं मिलता है। तब पिंकी रोते हुए घर जाती है तभी थोड़ी देर बाद चंदन( पिंकी का भाई )वहां पहुंचता है और पिंकी  को रोता हुआ देख उसके रोने का  कारण पूछता है।पिंकी रोते हुए जवाब देती है कि मैं भैया की कार से आई थी, जब मैं यहां उतरकर आ रही थी तब मेरा बैग गाड़ी में ही रह गया था और जब मैं वापस गाड़ी में देखती हूं । तो वह बैग वहां नहीं होता है।चंदन यह बातें बड़े गौर से सुन रहा होता है।  चंदन को यह समझने में ज्यादा देर नहीं लगी।कि उसने गाड़ी से जो बैग चुराया है वह किसी और का नहीं बल्कि उसकी ही बहन का था।  चंदन वहां से दौड़ता हुआ अपने सहयोगी मित्र के पास पहुंचता है। और उसे  सारी बात बता कर उस दिए हुए बैग को सही सलामत वापस मांगने की बात कहता है।  चंदन का दोस्त उसे बैग वापस कर देता है। चंदन बैग लेकर अपनी बहन पिंकी को दे देता है। पिंकी जब बैग चेक करती है तो वह पाती है कि उसकी दो सोने की चेन ,दो अंगूठी, उस बैग से गायब हैं  पिंकी समझ नहीं पा रही थी । कि वह  बैग मिलने की खुशी में खुश हो या सोने की चेन और अंगूठी के गायब होने पर दुखी हो। 
            थोड़ी देर में चंदन फिर से ,वहां से दौड़ते हुए अपने सहयोगी मित्र  के पास पहुंचता है, और उससे अंगूठी और चैन मांगने की बात करता है लेकिन उसके मना करने पर वह बार-बार अपने सहयोगी मित्र पर संदेह होने की वजह से उससे हाथापाई करने की कोशिश करता है।  थोड़ी ही देर में वाह खड़े हुए सभी लोगों को यह पता चल जाता है कि पिंकी का बैग किसी और ने नहीं चंदन ने ही चुराया था काफी देर तक यह सब होने के बाद शाम को चंदन को मैं अपने घर आने के लिए कहता हूं। चूँकि चंदन की पहले से ही बहुत बेज्जती हो चुकी थी, इसलिए वह आने से थोड़ा कतरा रहा था । क्योंकि वह मुझे लगभग 10 साल बाद मिल रहा था। चंदन शाम को मेरे घर आता है ।और मैं उसे चोरी छोड़ कर कुछ धंधा पानी करने की बात कहता हूं। और कहता हूं कि तुम अगर कुछ धंधा करना चाहो तो मैं तुम्हें कुछ  मदद कर सकता हूं । चंदन के कहने पर कि मैं  क्या धंधा कर सकता हूं। मैंने उसे कहा कि तुम एक लड़के के साथ मिलकर समोसा और पकौड़ा का धंधा करो मैं तुम्हारी पूरी मदद करूंगा। मेरे द्वारा समोसा और पकड़ो की बात सुनकर चंदन  मुंह बनाकर बोलता है, कि यह भी कोई धंधा होता है कि मैं  समोसा और पकोड़े बेचूँ। और वह मुझे यह बोलकर कि आप अपना काम करो। मैं अपना काम कर रहा हूं,वहां से चला जाता है। अगले दिन  गांव में अपने सभी रिश्तेदारों से मिलने के बाद, मैं गांव को देखने के लिए निकल जाता हूं। गांव में बहुत कुछ बदला हुआ था। गांव के खलियान पूरी तरीके से ढक चुके थे। लोग गांव में पुराने खेलों को छोड़कर अपने अपने मोबाइलों पर गेम खेलने और  गाने सुनने, फिल्में देखने मैं अपना समय निकाला करते  थे।  गांव का माहौल बिल्कुल बदल चुका था आखिर पूरे गांव में घूमने के बाद अपने घर आता हूं। और सभी से मिलकर वापस बैंगलोर आने के लिए आज्ञा लेता हूं।सभी लोगों से मिलने के बाद मैं अपनी कार से वापस आ रहा होता हूं। तब रास्ते में  दोबारा उसी ढाबे के पास वही लड़का कुछ समोसे बेचते हुए दिखाई देता है।


 मैं उस लड़के के पास जाकर उसे उसके धंधे के लिए बधाई देता हूं ।और कहता हूं कि अपने इस धंधे को पूरी मेहनत और ईमानदारी से कर,कोई भी धंधा छोटा या बड़ा नहीं होता केवल मेहनत ही सब कुछ करके दिखा सकती है और मैं उसे अपना विजिटिंग कार्ड देकर,यह कहते हुए कि कोई जरुरत हो तो सम्पर्क करना।और यह कह कर मै वहां से चल देता हूँ। 
                 काफी समय गुजरने के बाद एक दिन मैं  कुछ काम से अपने गांव आ रहा होता हूँ। तब रास्ते में उसी ढाबे पर अपनी गाड़ी रोकता हूं। जिस पर मैं पहले रोका था लेकिन इस बार क्या देखता हूं। कि उस ढाबे के सामने एक और रेस्टोरेंट बना होता है। मैं उस ढाबा को छोड़ कर सामने बने रेस्टोरेन्ट पर चाय नाश्ता करने के लिए जाता हूं ।और मैं क्या देखता हूं।
 कि इस  रेस्टोरेंट का जो मालिक है। वह वही लड़का है जो मुझे पहली बार अपनी बीमार बहन के साथ मिला था ।जैसे ही लड़का मुझे देखता है तो दौड़कर आता है और मेरे पैर छूकर मुझसे मेरा शुक्रिया अदा करता है।कि मैंने उसे रोजगार ढूंढने के तौर पर समोसे बनाने और पकोड़े तलने की बात कही। आज वह उस एरिया का सबसे अच्छा समोसे बनाने वाला है और दूर-दूर से लोग उसके यहां पर  नाश्ता पानी करने के लिए आते हैं उसका रेस्टोरेंट बहुत अच्छा चल रहा होता है।
                मैं उसे आगे इसी तरह अच्छे से मेहनत करते रहने की सलाह देकर अपने गांव की ओर चल देता हूं। गांव पहुंचने पर गांव वालों से मिल कर  अपना काम करने के बाद चंदन के बारे में जानने  की कोशिश करता हू।  तो पता चलता है।कि वह एक बहुत बड़ी चोरी के इल्जाम में जेल में बंद है।



 गांव में काम खत्म करने के बाद वापस बेंगलुरु आते समय मैं यही सोच रहा था ।कि मैंने एक ही सलाह 2 बेरोजगार लोगों को दी लेकिन एक बेरोजगार ने सलाह मानकर अपना रोजगार बना लिया और दूसरे में सलाह ठुकरा जेल  का रास्ता बना लिया।
                     धंधा कोई भी छोटा या बड़ा नहीं होता,बस लोगों की सोच और मेहनत ही है जो उस धंधे को बडा या छोटा बनाती हैं। इसलिए मेहनत करते रहना चाहिए। 

Monday, July 1, 2019

एक मुलाकात......गरीबी से अमीरी तक

             एक मुलाकात......गरीबी से अमीरी तक

 आज बड़े दिनों बाद वो याद फिर से आ गई जो कभी एक बार मुझसे बस यह कह कर  मिली थी कि क्या आपके पास थोड़ी सी जगह है जहां मैं बैठ सकती हूं........
                                           बात उन दिनों की है जब मैं जॉब के लिए  पुणे जा रहा था शायद यह कुदरत का ही कुछ करिश्मा होगा कि ट्रेन में पूरा कम्पार्टमेंट भरा होने के बाद भी मेरी  वाली बर्थ और मैं अकेला था और सभी बर्थ पर जरूरत से ज्यादा लोग बैठे हुए थे तभी  पीछे से आवाज आती है  क्षमा कीजिए क्या आपके पास थोड़ी सी जगह है जहां मैं बैठ सकती हूं पीछे मुड़कर देखता हूं तो एक  घुंघराले बाल वाली, बड़ी बड़ी आंखों वाली, गोल से चेहरे की, एक लड़की बड़ी मासूम से आवाज से मुझे अपनी सीट पर बैठने के लिए रिक्वेस्ट कर रही है कुछ देर और उसकी आंखों में देखने के बाद वह दोबारा से  कहती है क्या मैं यहां बैठ सकती हूं ट्रेन में कंपार्टमेंट की हालत देखकर और उस लड़की की बात को सुनकर मैंने उसे अपनी बर्थ पर बैठने के लिए बोल दिया शायद यह एक इशारा ही था। कि कोई मुझे उससे मिलाना चाहता था। कुछ देर शांत रहने के बाद जब ट्रेन में टीटी टिकट चेक करने के लिए आता है तब मैं खुद थोड़ी देर के लिए असमंजस में हो जाता हूं। क्योंकि मैं खुद ही दूसरे की सीट पर बैठा हुआ था। मैं अपने वेटिंग टिकट के साथ थर्ड एसी में  बैठा था। और अपने वेटिंग टिकट को ढूंढ रहा था। लड़की मुझे बहुत ही अजीब तरह से देख रही थी। टीटी के आने पर उसे अपना वेटिंग टिकट  दिखाने पर वह मुझे  अगले कंपार्टमेंट में  जाने के लिए बोलता है,और  लड़की की ओर देखते हुए  उसे टिकट दिखाने की बात करता है। लड़की उसे एक पेपर का टुकड़ा दिखाकर शांत बैठ जाती है। टीटी के वहां से जाने के बाद,मैं टीटी को काफी देर तक पलट पलट कर देखता रहता हूं। कि कहीं वो फिर से आकर मुझे इस बर्थ से  हटा ना दे। टीटी के जाने के बाद  जब  वह काफी देर तक दिखाई नहीं देता है तो चैन की सांस लेते हुए लड़की की ओर देखता हूं। और बड़े आराम के साथ उसकी नजरों में नजरें मिलाकर उसे बिना टिकट के, उस कागज के टुकड़े मात्र  को जानने की कोशिश करता हूं जिसे देख कर टीटी  बिना किसी सवाल जवाब के उसे  बैठने की मंजूरी  देता है और वहां से चला जाता है।  पहली बार में मुझे अनसुना करके वह लड़की अपने आप में व्यस्त होने  का एहसास कराती है मेरे दोबारा पूछने पर जवाब देती है कि यह कागज का टुकड़ा नहीं, ट्रेन का  पास है। क्योंकि मेरे पापा रेलवे में जॉब करते हैं इसलिए मेरी पूरी फैमिली बिना टिकट के केवल पास के मदद से कहीं भी यात्रा कर सकती है। यह कहकर वह लड़की चुप हो जाती है।
                                       बहुत देर तक उसे देखने के बाद,  कई बार बात करने की कोशिश करने के बाद भी कोई बात लम्बी  नहीं हो पा रही थी। हर बार बात सुरू होते ही खत्म हो रही थी।   आखिर बड़ी देर बाद वह मौका आ गया जब हमारी बात आखिरकार शुरू हो ही गई। शुक्र है उस समोसे वाले का जिसके समोसे तो हमने नहीं खाए लेकिन वह हमारी बात शुरू करने में  एक पुल का काम जरुर कर गया।  आखिर उसने अपना मुंह खोलना शुरू कर ही दिया और इस तरीके से अपना मुंह बना रही थी,समोसा को देखकर, जैसे यह समोसे ही उसके सबसे बड़े दुश्मन हो। क्या गुजर रही होगी उस समोसे वाले पर, जो वह समोसे उसके सामने लेकर आया। लेकिन शुक्र है कम से कम मेरी और उसकी बात तो शुरू हुई।
             वह समोसे वाले को देख कर मेरी ओर देखते हुए कहती है। यह लोग कितने गंदे तरीके से समोसे बनाते हैं। यह लोग साफ सफाई का बिल्कुल ध्यान नहीं रखते। ऐसे गंदे समोसे, इन लोगों के नहीं खाने चाहिए। उसकी बातों को गौर से सुनते हुए मैंने भी उसे यह बोल दिया, कि अगर वह यह समोसा बेचना भी बंद कर दे तो क्या उसकी बीवी बच्चों का खर्च आप जैसे लोग उठाएंगे।मेरी बात सुनकर वह गुस्से में आंखें बड़ी करते हुए मेरी ओर देखती है,लेकिन अंदर ही अंदर गुस्सा करके चुप हो जाती है। और  थोड़ी देर बाद बोलती है, कि अगर इन्हें समोसा बेचना है। तो साफ सफाई का ध्यान क्यों नहीं रखते, यह लोगों की सेहत के साथ खेलते हैं। तब मैंने कहा वह गरीब आदमी है, उसे जो सफाई पसंद है वह  उसी के हिसाब से सफाई रखता है।
                     यह तो समोसा ही था जिसने हमारी आखिर बात शुरू करवाई।धन्य हो उस समोसे का। एक  लंबी बहस होने के बाद आखिर में वह बोलती है, ठीक है चलो एक एक समोसा खाते हैं। शायद किसी ने सच ही कहा है कि किसी के पेट में उतरना है तो खाने के साथ मीठा परोस दो ।शायद यह बात मेरे लिए उस दिन पूरी तरीके से सही साबित हुई। लड़की धीरे धीरे मुझसे और मैं उससे बात करता चला गया।हमारे बीच हल्का फुल्का मजाक शुरु हो गया था।   

             लेकिन  शायद किसी को हमारा इस तरीके से हंसी मजाक करना अच्छा नहीं लग रहा था इसीलिए तो ,पीछे से आवाज आती है,भैया यह सीट मेरी है क्या आप मेरी सीट से उठेंगे। थोड़ी देर उस आदमी को देखने के बाद यह सोचता हूं। की अब क्या होगा ,मेरी सीट तो गई ।और  उस लड़की को देखते हुए अपना सामान उठाकर आगे की ओर बढ़ता हूँ। तभी आवाज आती हैं।
हैलौ,आपका मोबाइल यहीं रह गया है। ये आवाज उसी लडकी की थी। पलट कर देखता हूँ तो वह लड़की मेरी ओर तेजी से आ रही होती है। पास आकर मुझे मोबाइल फोन देते हुए, "थोड़ा धमकाते हुए अंदाज में कहती हैं।कि कैसे आदमी हो यार, अपने मोबाइल का भी ख्याल नहीं रखते",अगर मैं नहीं होती तब तो तुम्हारा मोबाइल गायब  ही था ।और यह कह कर, वो भी मेरे साथ ट्रेंन में आगे चलने लगती है। और फोन पर अपने पापा से बात करने के बाद बोलती है कि अगले डिब्बे में एक सीट खाली है। मैंने अपने अपने पापा से पता करवाया है,यह बोलते हुए मुझे आगे की ओर आने का इशारा करती हैं। "मरता क्या न करता "।सीट की तलाश में उसके पीछे जा रहा था। आखिर थोड़ा चलने के बाद एक सीट खाली मिल जाती है। और हम दोनों उस सीट पर बैठ जाते। कुछ ही देर बाद हम दोनों के बीच बातों का सिलसिला शुरू हो जाता है।
                                  सफर भी धीरे-धीरे अपने अंतिम क्षणों में आ रहा था जैसे-जैसे हमारी मंजिलें आ रही थी वैसे वैसे ही हम दोनों के बीच बातों में गहराई आती जा रही थी वह  मुझसे ऐसे बात कर रही थी जैसे कई बरसों से दोस्ती हो।लेकिन हमारी अभी तक कोई भी दोस्ती की बात नहीं हुई थी हम सिर्फ दो अनजान लोगों की तरह जाना  पहचाना व्यवहार कर रहे थे। और बार-बार यही सोच रहा था की ट्रेन से उतरने के बाद शायद इस लड़की से दोबारा मुलाकात नहीं होगी इस बात के डर से,मैं उससे ज्यादा से ज्यादा बातें करना  चाह रहा था लड़की भी बात करने में बहुत सहज महसूस करने लगी थी शायद यह  वही मौका था कि मैं उससे दोस्ती के  लिए बोलूं।  तभी मैं उसे दोस्ती के लिए बोलता हूं वह कुछ देर मेरी ओर देखती है और बोलती है कि हमारी बात ही क्या हुई है कि तुम मुझसे दोस्ती करना चाहते हो। अभी तक तो हमें एक दूसरे के नाम तक पता नहीं है और तुम दोस्ती की बात कर रहे हो। कुछ देर शांत रहने के बाद मैं  उससे उसका नाम पूछता हूं वह अपना नाम दीप बताती है और मुझसे अपना नाम बताने के लिए कहती है। मैं अपना नाम रवि बता देता हूं। धीरे धीरे बातें और बढ़ती हैं और हम एक दूसरे  को अपना अपना मोबाइल नंबर बांट देते हैं।
                                   मैं पुणे पहुंचने वाला  ही था कि  अचानक दीप बोलती है कि मैं जा रही हूं मेरा स्टेशन आ गया है  मन में ऐसा लग रहा था जैसे कोई  क्षण भर के लिए खुशी  देने के लिए आया  हो। और खुशी देकर जा रहा हो। मैं उस खुशी को साथ  रखना चाहता था इसीलिए मैं उससे दोबारा मिलने की ख्वाहिश रखता हूं। दीप बोलती है मैं पुणे में  पढ़ाई करती हूं,अभी मैं अपने नाना के यहां से आ रही हूं। मेरा घर अहमदनगर में पड़ता है मैं छुट्टियां बिताने के बाद  पुणे आऊंगी वहां हमारी मुलाकात हो सकती है। और यह कहते हुए वह ट्रेन से उतर जाती है  और  वह पलट कर तक नहीं देखती है। काफी देर तक उसे पीछे देखने के बाद जब वह नहीं दिखाई देती है तब मैं सब छोड़ के बस अपनी जॉब के लिए सोचना शुरू कर देता हूं और अपने इंटरव्यू के बारे में तैयारी की सोचता हूं ।आखिरकार मेरा स्टेशन पुणे आ जाता है और मैं भी अपने जॉब इंटरव्यू के लिए निकल पड़ता हूं
                                 मेरा इंटरव्यू भी बहुत बढ़िया जाता है मैं दीप को  अपनी जॉब लगने के लिए फोन करता हूं लेकिन उसका  नंबर स्विच ऑफ जाता है। मैं उसके नंबर पर एक मैसेज भेज कर अपने रूम के लिए चला जाता हूं।
मेरा दीप को  फोन करने की वजह मुझे  जाॅब मिलने के बारे में बताने  से ज्यादा  मेरा जॉब पुणे में ना होकर कोलकाता में मिलना था और मुझे अगले दिन ही कोलकाता के लिए निकलना था मुझे लग रहा था कि शायद  अब  हमारी  मुलाकात नहीं होगी । कई बार दीप को फोन करने के बाद  भी हर बार उसका नंबर बंद आया। और अगले दिन मैं कोलकाता के लिए निकल जाता हूं।
                          कोलकाता पहुंच कर मैं अपने जाॅब के काम में व्यस्त हो जाता हूँ ।मेरा पुराना नम्बर भी बंद हो जाता है ।मेरे दिमाग से दीप का नाम निकलता जा रहा था। मैं अपने नये दोस्तो के साथ घूमना फिरना, मौज मस्ती करने लगता हूँ। सब कुछ बहुत अच्छा चल रहा होता है कि एक दिन मेरी फेसबुक पर दीप की फ्रेंड रिक्वेश्ट आती है।
रिक्वेश्ट एक्सेप्ट करने के बाद एक बार फिर से दीप से  बात चीत का सिलसिला शुरू हो जाता है ।अब हम दोनों एक दूसरे से रोज बात करते,अपने दिन भर की बातें एक दूसरे को बताते। पूरे दिन भर की थकावट उससे बात मात्र करने से दूर हो जाती थी। एक दिन मेरे आफिस में मुझे पुणे जाने को कहा,पुणे जाने की बात सुन कर मेरे मन में एक नयी खुशी की लहर दौड जाती है। और मैं दीप को बिना बताऐ उसे सरप्राइज देने के लिए पुणे के लिए निकल पड़ता हूँ।
            मैं , ट्रेन से पुणे देर रात को पहुंचता हूँ। और अपने एक पुणे के नए दोस्त के फ्लेट पर जाने के लिए टैक्सी लेता हूँ। और दोस्त के फ्लेट पर पहुँचता हूँ। फ्लेट पर पहुंच कर दरवाजे की घण्टी बजाता हूँ। थोड़ी देर बाद दोस्त दरवाजा खोलता है। मुझे दरवाजे पर देख मेरा दोस्त थोड़ी देर के लिए असमंजस में आ जाता है। और जल्दी से मुझे अंदर कमरे में ले जाता है। और बोलता है कि तू बता के क्यों नहीं आया। आज मेंरी गर्ल फ्रेड मेरे फ्लेट पर आई है पूरी रात के लिए। मैं अपने दोस्त की बातो को अच्छे से समझ रहा था। कि उसका और उसकी गर्ल फ्रेड का क्या मामला है। और मैं भी उस दोस्त को यह बोल कर कि अपनी गर्लफ्रेंड से मुलाकात करवा दे,और मैं बाहर घूम के आता हूँ। तू मजे कर ले। और इसके साथ ही वह दोस्त मुझे अपनी गर्लफ्रेंड से मुलाकात कराने के लिए दूसरे कमरे में ले जाता। जैसे ही मैं कमरे में घुसता हूँ। तो सामने खडी अधनंगे कपड़ों में उसकी गर्लफ्रेंड को देखकर मुझे मेरी आँखों पर यकीन नहीं हो रहा था कि वह लड़की कोई और नही बल्कि मेरे कोलकाता के बाॅस की पत्नी हैं। जिसे लेने के लिए बाॅस ने मुझे पुणे भेजा था।
                                 देखकर बाॅस की पत्नी को अपने दोस्त के साथ,मै चुपचाप बाहर चला जाता हूँ। कुछ देर बाद सुबह हो जाती है ।और मैं दीप को फोन करके उसके काॅलेज में मिल कर सरप्राइज देने की बात करता हूँ। दोस्त के फ्लेट पर तैयार हो कर दीप के काॅलेज पहुंचा। तो क्या देखता हूँ ।कि दीप सामने से मस्त कपड़ों में, उसी लड़की के साथ आ रही है जो मेरे कोलकाता वाले बाॅस की पत्नी और मेरे दोस्त की गर्लफ्रेंड है। मुझे काॅलेज मे देख कर जितना हैरान दीप नहीं थी उससे कहीं ज्यादा हैरान वो बाॅस की पत्नी थी। मैं अपनी जेब से अंगूठी निकाल कर दीप को पहना कर उसे प्रपोज कर देता हूँ। दीप भी मेरे प्रपोज को स्वीकार कर लेती है। लेकिन तभी वो बाॅस की पत्नी बीच में  दीप को पीछे खींचते हुए बोलती हैं कि कौन हो तुम और क्या औकात है तुम्हारी। जो तुम मेरी बहन को प्रपोज कर रहें हो (चूँकि मैं कम्पनी में नया और छोटा कर्मचारी होता हूँ।...मन में सोचता हूँ।) मैं बोलता हूं कि मैं आपके पति की कोलकाता वाली कम्पनी का सीईओ हूँ। मेरा नाम रवि है। और मैं बाॅस के कहने पर आपको लेने आया हूँ। मेरी ये बात सुनकर दीप और उसकी बहन(बाॅस की पत्नी) दोनों लोग हैरान  रह जाते है। और हैरानी भरी आँखों से दीप मेरी ओर देखते हुए मुझसे पूँछती हैं। कि  रवि,तुम तो बोल रहे थे कि तुम तो कम्पनी में एक छोटे से कर्मचारी हो। तब मैं उसकी बहन को देखते हुए बोलता हूं कि जैसे ही मै आप की बहन को कोलकाता में बाॅस के पास ले जाऊँगा ,तो बाॅस मेरे काम से खुश होकर मुझे सीईओ बना देंगे।इतना सुन कर ,दीप खुश हो कर मुझे गले लगा लेती है। और अपनी बहन के पुणे वाले फ्लेट पर चलने के लिए बोलती है। चलते चलते मैं उसकी बहन के कान में बोल देता हूँ। कि मैने अभी जो भी  बोला था सब झूठ हैं। लेकिन अब आप को ये झूठ को हकीकत बनाना है। (दीप की बहन मुझे घूरते हुए ) । अगले दिन ही मैं और दीप की  बहन कोलकाता के लिए निकल जाते हैं। और कोलकाता पहुँच कर वही होता है जैसा कि दीप की बहन को बोला था ।मै कम्पनी का नया सीईओ बन जाता हूँ।
                                      अब मेरी सारी गरीबी की स्थिति दूर हो चुकी थी। आज मेरी दीप के साथ सगाई हो चुकी हैं ।आज भी  मुझे वो मुलाकात याद है जिसने मुझ जैसे छोटे  से कर्मचारी को एक कम्पनी का सीईओ बना दिया। और दीप के साथ हुई पहली मुलाकात को याद करता हूँ।
                     वाह क्या मुलाकात थी 😀😀😀😀







                     
                             



Friday, June 28, 2019

मिस्ड काॅल......एक प्रेम कथा।


                मिस्ड काॅल.....एक प्रेम कथा


                       ये बात उन दिनो की है जब किसी के पास मोबाइल होना एक  बड़ी बात मानी जाती थी। लोग मोबाइल पर ऐसे बात करते थे जैसे किसी टाटा या बिरला के खानदान से हो। उन्है अपने पास मोबाइल होने का ऐसा गुरूर रहता था जैसे अब बस वही है सब कुछ।
                         धीरे धीरे समय बदला और अधिकतर लोग मोबाइल का इस्तेमाल करने लगे ।अब लोगों को अपनी बात दूर किसी सगे-सम्बन्धी से करने के लिए पत्र(चिठ्ठी) का इंतजार नहीं करना होता था। वह अपने मोबाइल से जब चाहे और जिससे चाहे बात कर सकते थे।समय के साथ मोबाइल का प्रचलन धीरे धीरे बढता गया।इन्हीं दिनों कानपुर के पास के एक कस्बा में रचना नाम की एक लड़की रहती थी। चेहरे से मासूम और दिल में बेचैनी के साथ वह लम्बे लम्बे कदमो से मोबाइल की दुकान पर पहुंचती है। और अच्छा सा मोबाइल दिखाने की बात करती है। कई सारे मोबाइल देखने के बाद आखिर में वह एक मोबाइल पसंद करके घर लाती है। नए मोबाइल मे नई सिम डाल कर अपने सभी मित्रों को अपने नये मोबाइल लेने की बात बताती है।
                 एक दिन वह कॉलेज से वापस आकर घर पर अकेले बैठी थी। कि तभी अचानक एक घण्टी की आवाज सुनाई देती हैं।यह घण्टी कुछ और नहीं बल्कि मोबाइल की टोन थी। रचना के मोबाइल उठाने से पहले ही काल कट जाती हैं। रचना मोबाइल को अच्छे से देखती है। और मोबाइल पर लिखे मिस्ड काॅल को देख कर उस नम्बर पर काॅल करने की सोचती है। बार बार उसके मन में बस यही ख्याल आ रहा था,कि अखिर कौन है वो जिसने उसे मिस्ड काॅल किया। इसी सोच में डूबे हुए शाम कब हो जाती है उसे कोई खबर नहीं रहती।
                            शाम को घर के सारे लोग आते हैं, और    मिल कर हंसी मजाक करते है,लेकिन रचना के मन में कुछ और ही चल रहा होता है। वह परिवार के बीच होते हुए भी उनके बीच नही थी, उसके मन में एक अजीब सी बेचैनी हो रही थी। और बार बार बस उस मिस्ड काॅल के बारे में सोच रही होती है ।रात में सब लोग खाना खाने के बाद अपने अपने कमरे में चले जाते हैं ।रचना भी अपने कमरे में चली जाती हैं। और बिस्तर पर लेट कर, तकिऐ को सीने से लगाऐ हुए बस यही सोचती रहती है,कि कौन है वो जिसने उसे मिस्ड काॅल किया। यही सोचते सोचते कब रचना की आँख लग जाती है पता भी नहीं चलता।
                            अगली सुबह रचना तैयार होकर नाश्ता  करके अपने कॉलेज के लिए चल देती है। रास्ते में जाते हुए रचना उस मिस्ड काॅल वाले नम्बर को देखती जाती है और उस मिस्ड काॅल के पीछे कौन है,जानने की बैचेनी में उस नम्बर पर काॅल कर देती है। बहुत देर तक रिंग होने के बाद भी जब कोई फोन नही उठाता है तब रचना गुस्से में मोबाइल को बंद करके अपने बैग में रख लेती है। और  कालेज पहुंच कर अपने दोस्तों के साथ क्लास में पढ़ाई करती हैं। कॉलेज से घर आते हुए   रास्ते में वह यही सोचती है की यह मिस कॉल आखिर है किसका।  और फिर से एक बार वह उसी नंबर पर कॉल करती है इस बार वह नंबर कोई लड़का उठाता है लड़के की आवाज सुनकर वह फोन काट देती है और मन में एक संकोच के साथ यही सोचती है कि आखिर यह किसका नंबर लग गया है थोड़ी ही देर बाद उसके नंबर पर घंटी बजती है डरते डरते फोन उठाती है और बड़ी ही शांत स्वभाव में डरे हुए अंदाज में सामने वाले से बात करने की कोशिश करती है सामने वाले के द्वारा पूछे जाने पर के आपने मुझे मिस कॉल किया है तो वह गुस्से में आकर उससे पूछती है  की आप हो कौन और आपने पहले मुझे मिस कॉल क्यों किया। सामने वाला यह बोलकर की गलती से नंबर कनेक्ट हो गया,सॉरी बोल कर फोन काट देता है लेकिन रचना के मन में तो कुछ और ही चल रहा था 2 दिन तक उस  मिस्ड कॉल के बारे में सोच सोच कर उसके दिल में उस सामने वाले   के लिए एक अजीब सा एहसास होने लगा था। और वह घर पहुंचने तक उसी के बारे में सोचती रहती है। घर पहुंचकर वह सब के साथ मिलकर हंसी मजाक करती है, और शाम का समय परिवार वालों के साथ बताती है। रात में खाना खाने के बाद जब वह अपने कमरे में जाती है, और बिस्तर पर लेटे हुए बस यही सोचती है कि आखिर वह लड़का है कौन, और इसी बेचैनी में वह एक बार फिर से उस मिस्ड कॉल वाले नंबर पर कॉल कर बैठती है।फोन रिसीव होने पर सामने वाले लड़के का जवाब सुनकर रचना परेशान हो जाती है।वह लड़का बोलता है के आप वही हो जो मुझे 2 दिन से फोन कर रही हो, कौन हो तुम, और क्या चाहती हो। यह बात सुनकर रचना के मन में एक अजीब सा बेचैनी  और एक अलग सा एहसास होने लगता है रचना के मुंह में बोलने के लिए कुछ शब्द नहीं रहते और वह सामने वाले से बस उसको जानने की फरमाइश करती है। यह सोचकर कि सामने वाला अनजान है रचना अपनी कोई भी सच्चाई नहीं बताती है और लड़के से सारी सच्चाई पता करने की कोशिश करती है लड़का बहुत अच्छा तरीके से उसे अपने बारे में बता देता है।बहुत देर बात करने के बाद रचना को उस लड़के की बातों से बहुत आनंद की प्राप्ति होती है और वह उससे दोबारा बात करने के लिए बोलती है रचना की यह बात सुनकर लड़का कुछ देर के लिए परेशान होता है, कि यह कौन है   जो मुझसे इस तरह बार-बार बात करने के लिए  कहती है  रचना के बार बार कहने पर वह लड़का मान जाता है  लड़का कहता है कि वह  अभी डिफेंस की ट्रेनिंग में है तो वह ज्यादा बात नहीं कर पाएगा लेकिन जब भी उसके पास समय होगा वह बात कर लिया करेगा। इतना बात करके रचना उस लड़के को गुड नाइट बोलकर फोन काट देती है
                                 अब रचना अक्सर जब भी खाली समय पाती है तो वह  उस लड़के को कॉल लगाती है और लड़का भी अपने खाली समय में रचना से अपने दिल की बातें करने लगता है धीरे धीरे समय गुजरता जाता है और लड़का ट्रेनिंग पास आउट होता है और नई जगह पोस्टिंग जाता है इसी बीच उस  रचना का एक्सीडेंट हो जाता है और उसका मोबाइल टूट जाता है वहां दूसरी ओर लड़का कई बार रचना के नंबर पर फोन करता है लेकिन कोई उत्तर नहीं मिलता है रचना का नंबर बार-बार बंद जा रहा था कई दिनों तक फोन करने के बाद भी जब कोई उत्तर नहीं मिलता है तो वह उसके नंबर पर कुछ मैसेज छोड़ देता है और उसे कभी कॉल ना करने की बात करता है। जब रचना को यहां पता चलता है वह हॉस्पिटल में है और उसका मोबाइल टूट चुका है   तो उसे अपने एक्सीडेंट से ज्यादा मोबाइल के टूटने का दुख होता है और बस यही सोचती है कि आखिर उस लड़के से दोबारा कैसे बात होगी उसके पास लड़के का कहीं नंबर लिखा हुआ नहीं था आखिर कुछ दिनों बाद हॉस्पिटल से डिस्चार्ज होने के बाद जब रचना ठीक होकर अपने घर आती है,तो सबसे पहले अपने मोबाइल की सिम को दोबारा चालू करवाने की कोशिश करती है और वह अपनी कोशिश में कामयाब भी हो जाती है   इधर वह लड़का  रचना  के बारे में सोच सोच कर परेशान रहता है और आखिर एक दिन वह फिर से रचना के नंबर पर कॉल पर बैठता है रचना भी उसके नंबर का और उसके कॉल  का बेसब्री के साथ  इंतजार कर रही थी लड़के  का कॉल आते ही वह उसकी आवाज सुनकर पूरी तरीके से ठीक हो जाती है और आंखों में आंसुओं के साथ जोर जोर से रोने लगती है के आखिर इतने दिनों तक तुमने उससे संपर्क बनाने की कोशिश क्यों नहीं की ।लड़के के द्वारा कही गई बात सुनकर रचना को लड़के के ऊपर प्यार आने लगता है लड़का कहता है कि मैंने कभी किसी से इतनी बात नहीं की जितना तुमसे की है शायद तुम ही मेरा पहला प्यार हो रचना ।यह बात सुनकर  रचना चुपचाप रह जाती है और बस रोती रहती है।
○                             बहुत दिन होने के बाद रचना उस लड़के को मिलने के लिए बोलती है लड़का भी बहुत दिन तक मोबाइल पर बात करते हुए  रचना को सामने से देखने की इच्छा रखता है दोनों एक दूसरे की बात मान कर मिलने का प्लान बनाते हैं लड़का पहली छुट्टी आता है और रचना से मिलने  के लिए जाता है रचना भी उसे एक पार्क में मिलने के लिए बुलाती है दोनों की मुलाकात एक पार्क में होती है जहां वह लड़का रचना को देखकर आश्चर्यचकित रह जाता है यह रचना कोई कुंवारी लड़की नहीं बल्कि एक शादीशुदा लड़की है जो उससे मिलने आई है। लड़के को इस तरीके से  आश्चर्यचकित  देख   कर रचना उस  लड़के को अपनी सारी हकीकत बताने को तैयार हो जाती है  और अपने साथ हुए बचपन के जल्दी विवाह और विवाह के बाद पति द्वारा जल्दी से छोड़ दिए जाने के दर्द की कहानी उस लड़के को बताती है वह लड़की शादीशुदा होते हुए भी अपने मां बाप के यहां वह रही थी लड़की की यह बात सुनकर लड़का उदास हो जाता है और उसे भी लड़की के ऊपर प्यार आने लगता है वह लड़का रचना को अपनी सारी हकीकत बता कर  वहां से चला जाता है और दोबारा मिलने की ख्वाहिश करता है रचना को भी उससे  दोबारा मिलने की इच्छा होती है।और वह इसी आस में के अगली बार फिर से मुलाकात होगी एक दूसरे को अलविदा कह कर चले जाते हैं
○                       उसके बाद से उनके बीच अक्सर बातें होने लगती हैं  धीरे धीरे उनकी बातें  प्यार मे बदलने लगती हैं। रचना  लड़के से बहुत प्यार करने लगती है लड़का भी लड़की से बहुत प्यार करने लगता है लेकिन कुदरत को कुछ और ही मंजूर था रचना को उसके पति के घर से बुलावा आ जाता है उसका पति उसे लेने के लिए आता है। रचना यह सोच नहीं पा रही थी, कि वह क्या करें, वह अपने पति के साथ उसके घर चली जाए या वो जिस लड़के से प्यार करने लगी है  उसके साथ जाए। आखिर मां बाप की मजबूरी को ध्यान में रखते हुए वह अपने पति के साथ उसके घर वापस चली जाती है।पति के घर जाने के बाद भी  उसके दिलो-दिमाग में बस उस लड़के का ही ख्याल रहता था उसे जब भी समय मिलता था वह लड़के से बात करने की कोशिश करती थी जब लड़के को यह पता चला  की रचना अपने पति के घर जा चुकी है तो लड़का रचना की जिंदगी से बाहर आने की कोशिश करता है। और रचना को अपने पति के साथ हंसी-खुशी रहने की बात करता है।  लेकिन रचना को केवल और केवल उस लड़के का ही साथ चाहिए था लड़के के बार-बार मना करने पर भी वह उसके साथ ही रहना चाहती थी।लड़का जानता था कि रचना एक शादीशुदा औरत है,और वह उसके पति को धोखा नहीं देना चाहता था और इसलिए  हर बार जब भी रचना उससे बात करती   लड़का उसे हर बार उसके पति के साथ रहने और  उसी को प्यार करने की बात   करता। बहुत समझाने पर भी रचना को कुछ नहीं समझ  आ रहा था। उसे सिर्फ और सिर्फ उस लड़के   मे ही अपना  सब कुछ  दिखाई दे रहा था।  लेकिन लड़का बहुत समझदार था वह जब भी रचना से बात करता हर बार रचना को उसके पति की तारीफ करता और रचना से कहता कि वह अपने पति के साथ खुश रहे । हमारे  बीच जो प्यार था वह हमेशा रहेगा। लेकिन जो तुम्हारा असल प्यार है  वह तुम्हारा पति है। मैं सिर्फ और सिर्फ तुम्हारे लिए एक मिस कॉल हूं ।और मुझे मिस कॉल ही बना रहने दो।मेरे प्यार को अपने पति के प्यार में शामिल मत होने दो ।मैं मिस कॉल हूं और मेरा प्यार भी एक मिस कॉल ही है।यह कहकर लड़का फोन काट देता है और मोबाइल को बंद करके सिम को हमेशा के लिए तोड़ कर फेंक देता है और कोशिश करता है कि कभी किसी भी मिस कॉल पर किसी से बात ज्यादा ना करें।
               






 








 





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